पक्षि विज्ञान केंद्र में अब राजभाषा के पंख लेगेंगे

पक्षि-विज्ञान केंद्र में हिंदी अब उड़ान भरेगी

     26 मई, 2008 को मुझे सालिम अली पक्षि-विज्ञान एवं प्रकृति-विज्ञान केंद्र (Sálim Ali Centre for Ornithology and Natural History) देखने का सौभाग्य मिला । सुख्यात पक्षि-विज्ञानी डॉ. सालिम अली (1896 – 1987) की स्मृति में आनैकट्टी कोयंबत्तूर में 1990 में स्थापित यह केंद्र पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त केंद्र है । पक्षियों को केंद्रीय विषय बनाकर शोध, शिक्षा एवं जन सहभागिता द्वारा भारत के जैव-वैविद्य के संरक्षण तथा उसके उपयोग में मदद करना इस संस्था का संकल्पभाव है । हरियाली से भरी घाटियों के बीच स्थित यह केंद्र मनमोहक प्राकृतिक संपदा से सुशोभित है ।    

      चूँकि यह भारत सरकार की संस्था है और इसका एक राष्ट्रीय महत्व भी है, इसमें राजभाषा हिंदी का प्रयोग, प्रचार-प्रसार का अपना महत्व है । इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए मैंने नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत इस केंद्र को समिति का सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया था । तदनुसार जो भी पत्र साकोन (SACON) की सेवा में भेजे गए उनका तत्काल जवाब देते हुए एर्ली बर्ड का उदाहरण स्थापित किया गया है । वास्तव में इस केंद्र में हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान रखनेवाले कर्मियों की नितांत कमी है, मगर सब हिंदी सीखने में रुचि रखते हैं । इस केंद्र के कनिष्ठ प्रशासनिक प्रबंधक श्री आर. जय कुमार जी ने सबसे पहले हिंदी सीखने की इच्छा जाहिर की है । वैसे वायु सेना से सेवा-निवृत्त होने के कारण वे हिंदी अच्छी हिंदी बोल तो लेते हैं, मगर लिखना एवं पढ़ना भी तुरंत सीखना भी चाहते हैं । एक निष्ठावान प्रशासनिक अधिकारी के रूप में हिंदी के प्रति सकारात्मक भावना रखने वाले जय कुमार जी निश्चय ही अनुकरणीय आदर्श हैं । इस केंद्र के निदेशक प्रभारी डॉ. पी.ए. अजीज जी भी हिंदी जानते हैं और अपने दायित्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र में हिंदी कार्यान्वयन के लिए वे तत्पर नज़र आए । उन्होंने हिंदी कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित सभी कदम उठाने का आश्वासन दिया । उचित मार्ग-दर्शन के अभाव में कई मामलों में राजभाषा अनुपालन से वंचित यह केंद्र एक मामले में तो निश्चय ही अनुकरणीय है । यह अनुकरणीय तथ्य है कि इस केंद्र की वार्षिक रिपोर्ट नियमित रूप से हिंदी में भी जारी की जा रही है । अब धीरे-धीरे सभी मामलों में राजभाषा कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु कदम बढ़ाते हुए इस केंद्र ने राजभाषा को भी पंख जोड़ दिया है । निश्चय ही यह केंद्र इस दिशा में प्रगति की ओर बढ़ेगी, ऐसा मेरा विश्वास है ।

     केंद्र के विभिन्न विभागों का दौरा करते हुए मैंने डॉ. एस. मुरलीधरन जी से भी मुलाक़ात की जो इस केंद्र में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पारिस्थिति-विष-विज्ञान विभाग के प्रधान हैं । डॉ. मुरलीधरन जी से बोलते हुए मैंने महसूस किया कि मैं कोई हिंदी भाषी से ही बोल रहा हूँ । वे इतनी अच्छी हिंदी बोल लेते हैं । चर्चा के दौरान मुरली जी ने मेरे इस बात से सहमत थे कि भारतीय वैज्ञानिकों को चाहिए कि वे अपनी शोधाध्यनों के परिणाम भारतीय भाषाओं के माध्यम से करें । इससे विज्ञान के साथ लोगों का लगाव बढ़ेगा, तब जाकर वैज्ञानिकों के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की पूर्ति में जन सहयोग भी संभव है । इस केंद्र के विभिन्न विभागों के नामपट्ट हिंदी में भी प्रदर्शित करने की सलाह मैंने दी, जिसे निदेशक महोदय ने तत्काल सहर्ष स्वीकृति दी । इनके अनुवाद कार्य में मेरी ही मदद मांगी गई । मैंने सभी आवश्यक नामपट्टों, रबड़ मुहरों का अनुवाद किया है । इनका अनुवाद करते हुए मैंने महसूस किया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय (माध्यमिक एवं उच्चतर शिक्षा विभाग) के तहत सक्रिय आयोग – वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित विभिन्न शब्दावलियों के संकलनों की सूची तो उपलब्ध है । तमाम शब्दावली भी डाउनलोड अथवा देखने हेतु वेबसाइट पर उपलब्ध करा देते तो हिंदी के प्रयोग एवं प्रगति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा ।

     सालिम अली पक्षि-विज्ञान एवं प्रकृति-विज्ञान केंद्र के लिए मैंने जो भी अनुवाद किए है उनमें से कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्दों का उल्लेख यहाँ कर रहा हूँ जो उस केंद्र के मुख्य विभागों एवं कार्यों के नाम, अधिकारियों के पदनाम भी हैं ।  

Environmental Impact Assessment – पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन 

 Eco-toxicology –  पारिस्थितिकी विष विज्ञान 

Landscape Ecology –  भू-दृश्य पारिस्थितिकी 

Conservation Ecology –  संरक्षण पारिस्थितिकी 

Nature Education Officer – प्रकृति शिक्षा अधिकारी / 

Director in charge –  निदेशक प्रभारी  

Sr. Principal Scientist –  वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक 

Senior Scientist –  वरिष्ठ वैज्ञानिक 

Site Engineer –  स्थल अभियंता 

      इस केंद्र में शोधाध्यन के लिए कई छात्र आते रहते हैं । उन सबका शोध मुख्यतः संबद्ध वैज्ञानिक विषयों पर ही केंद्रित होता है । हिंदी प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय के विज्ञान विषय के शोधार्थी इस केंद्र में पधार कर उपयुक्त शब्दावलियों पर भी शोध-कार्य करें तो इस केंद्र द्वारा समय समय पर प्रकाशित होने वाले वैज्ञानिक शोध-परिणामों को हिंदी में भी प्रकाशित करने में सुविधा हो सकती है । हिंदी भाषी विज्ञान विषयक छात्रों, शोधार्थियों एवं हिंदी प्रेमियों से मेरा अनुरोध है विज्ञान का प्रचार-प्रसार भारतीय भाषाओं के माध्यम करने में अपना भरपूर योगदान सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़े । तब निश्चय ही भारतीय भाषाएँ उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ बन पाएंगी । आपकी सूचना हेतु सालिम अली केंद्र का संपर्क यहाँ दे रहा हूँ –

सालिम अली पक्षि-विज्ञान एवं प्रकृति-विज्ञान केंद्र / Sálim Ali Centre for Ornithology and Natural History

आनैकट्टि/Anaikatty (Post) कोयंबत्तूर/Coimbatore – 641 108

दू.भाः91-422-2657102-105 फैक्सः91-422-2657101 http://www.sacon.org

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